महाशिवरात्रि के दिन रूद्राक्ष को धारण करना क्यों 100% अधिक शुभ माना जाता है?
शिवमहापुराण के अनुसार रूद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आँसूओं से हुई है। पृथ्वी पर जिस भी स्थान पर भगवान शिव के आंसू गिरे उस स्थान पर रूद्राक्ष के वृक्ष पैदा हुए। ऐसा माना जाता है कि रूद्राक्ष को धारण करने वाले व्यक्ति पर भोलेनाथ की कृपा सदैव बनी रहती है, और उनके जीवन की सभी कठिनाईयां दूर होती हैं।
वैसे तो रूद्राक्ष को वर्ष के किसी भी धारण किया जा सकता है परंतु महाशिवरात्रि के दिन इस चमत्कारी मनके को धारण करने से धारको विशेष शुभ फल प्राप्त होता है। इस लेख में हम आपको बताने जा रहे हैं कि रूद्राक्ष को महाशिवरात्रि के दिन क्यों 100% अधिक शुभ माना जाता है
महाशिवरात्रि को धर्म ग्रंथों में वर्ष का सबसे पावन दिन माना गया है। महाशिवरात्रि को भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की रात माना जाता है। यह त्यौहार फाल्गुन माह की 14वें दिन मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध( Northern Hemisphere) की स्थिति कुछ इस तरह की होती है कि मानव शरीर में ऊर्जा का स्वाभाविक संचार होता है। यह वह दिन है जब प्रकृति व्यक्ति को उसकी आध्यात्मिक ऊंचाई की ओर धकेलती है। इसी कारण से इस दिन रूद्राक्ष को पहनना सौ गुना अधिक शुभ है।
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वर्ष 2025 की महाशिवरात्रि इस वजह से भी खास है क्योंकि इस बार यह त्यौहार पावन महाकुंभ मेले के दौरान ही संपन्न होगा। ऐसा दिव्य 144 सालों में एक बार ही बनता है, अतः जो भी व्यक्ति इस महाशिवरात्रि के दौरान रूद्राक्ष को धारण करेगा उसके सभी पाप, तथा कष्टों से छुटकारा मिलेगा तथा आत्मिक शांति प्राप्त होगी।
रूद्राक्ष को इस दिन धारण करने से नकारात्मक शक्तियों से बचाव होता है और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है।
परंतु रूद्राक्ष को धारण करने के लाभ तभी प्राप्त होते हैं, जब आप असली तथा अच्छी गुणवत्ता का रूद्राक्ष धारण करें। राशिरतनभाग्य से आप सौ फीसदी असली रूद्राक्ष वाजिब दामों पर प्राप्त कर सकते हैं, हम प्रत्येक रूद्राक्ष के साथ लैब सर्टिफिकेट भी प्रदान करते हैं, जिससे आपको पूर्ण संतुष्टि प्राप्त हो।
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